जिराफ मनोर : जिराफ संग लंच
कल्पना करें कि वन्य जीव के साथ-संग लंच या डिनर करना हो। सुबह जागने के बाद ताजगी महसूस करनी हो आैर कोई वन्य जीव 'गुड मार्निंग" करें तो मन-तन-मस्तिष्क एक 'रोमांच" से भर उठेगा। खास तौर से तब जब एहसास होगा कि वन्य जीव खतरनाक नहीं।
जी हां, जीवन में वन्य जीव का एहसास करना हो या वन्य जीव के आनन्द अनुभूति करनी हो तो केन्या बेहतरीन साबित होगा। खतरा नहीं पर एक सुखद एहसास। केन्या की राजधानी नैरोबी का खास होटल 'जिराफ मनोर" देश-दुनिया में खास ख्याति रखता है। नैरोबी का यह होटल जिराफ मनोर सफारी संग्रह का हिस्सा है।
नैरोबी के उपनगर लैंगटाटा में करीब एक सौ चालीस एकड़ में फैले इस विशेष होटल में रात गुजारना एक सुखद अनुभूति कराता है। जैसा कि नाम से एहसास होता है कि जिराफ जैसा कुछ अवश्य होगा लेकिन जिराफ जैसा नहीं वास्तविक अर्थात सच का जिराफ होटल के अन्दर-बाहर अपनी उपस्थिति का एहसास करायेगा। कभी डिनर की टेबल पर जिराफ मिलेगा तो कभी होटल के लॉन में साथ में वॉक करेगा।
गोगो फॉल्स रोड पर स्थित जिराफ मनोर में ऑलीशान कमरे हैं तो वहीं जिराफ खासियत हैं। करीब एक सौ चालीस एकड़ वन क्षेत्र के करीब बारह एकड़ में होटल का हिस्सा है। इसे एक विशेष बुटिक होटल के तौर पर माना जाता है। दुनिया के पर्यटक इसकी विशेषताओं से प्रभावित होकर आते हैं। इसमें सामान्यत: छह सुइट्स हैं। इनमें से एक सुइट लेखक करेन ब्लिक्सन के नाम पर है।
यह सफारी सामान्यत: 1930 में अस्तित्व में आया। 'जिराफ मनोर" व परिसर में घूमना फिल्म में घूमने जैसा महसूस होता है। दिलचस्प यह कि राउण्डस्चिर जिराफ के झुण्ड 'जिराफ मनोर" परिसर एवं वन क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण करते रहते हैं। इस क्षेत्र के जिराफ को पर्यटकों से खासा प्रेम-स्नेह है। जिराफ सुबह शाम कभी भी पर्यटकों के संग हो सकते हैं।
होटल में नाश्ता कर रहे हों, लंच-डिनर कर रहे हों आैर अचानक टेबल पर जिराफ की गर्दन दिख जाये तो चौंकना स्वाभाविक है लेकिन बिना हाथ से खिलाये जिराफ कुछ भी भोजन को स्पर्श नहीं करेगा। सूर्योदय एवं अस्त होता सूर्य होटल की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। देश-दुनिया के पर्यटक एक सुखद एहसास के लिए आते-जाते रहते हैं।

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