Friday, 8 September 2017

माचू पिच्चू : सौन्दर्य का खजाना

    'सौन्दर्य शास्त्र" में 'प्राकृतिक सौन्दर्य" भी कमतर नहीं। जी हां, दुनिया के सात अजूबा-आश्चर्य में रहस्य-रोमांच है तो वहीं सौन्दर्य भी है।

      दक्षिण अमेरिका के देश पेरु का 'माचू पिच्चू" रहस्य के साथ सौन्दर्य को भी रेखांकित करता है। हालात यह हैं कि पेरु का 'माचू पिच्चू" सांस्कृतिक स्थल के साथ साथ महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी है। कोलम्बस पूूर्व युग के इंका सभ्यता का यह ऐतिहासिक स्थल दक्षिण अमेरिका के खास स्थलों में गिना जाता है। 
       इसे 'इंकाओं का खोया शहर" भी कहा जाता है तो 'लॉस्ट सिटी ऑफ इन्का" का खिताब भी हासिल है। समुद्र तल से करीब 2430 मीटर शिखर पर स्थित इस पुरातन स्थल को दुनिया के 'सात आश्चर्य" में स्थान मिला है। इंकाओं की पुरातन शैली में बना 'माचू पिच्चू" उरुबाम्बा नदी के शीर्ष-शिखर पर स्थित एक पर्वत श्रंखला पर विद्यमान है। कुज्जों से करीब 80 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित 'माचू पिच्चू" इंका साम्राज्य का अंतिम अवशेष माना जाता है। 
      'माचू पिच्चू" के निर्माण में खास तौर से पॉलिश्ड पत्थर श्रंखला का उपयोग किया गया है। इन पॉलिश्ड पत्थर श्रंखला की चमक विशेष है। विश्व की इस धरोहर की खोज का श्रेय अमेरिकी इतिहासकार हीरम बिंघम को है। इतिहासकार ने 'माचू पिच्चू" की खोज वर्ष 1911 में की थी। हालांकि अब यह स्थान दुनिया का विशेष महत्वपूर्ण एवं आकर्षक पर्यटन स्थल बन चुका है। पेरू शासन ने 1981 में 'माचू पिच्चू" को ऐतिहासिक देवालय घोषित कर दिया था।
    इसके बाद 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा देकर गौरव बढ़ाया। विशेषज्ञों की मानें तो स्पेनियों ने इंकाओं पर विजय हासिल करने के बाद भी 'माचू पिच्चू" को नहीं लूटा। विजय हासिल करने बाद 'माचू पिच्चू" को न लूटा जाना भी रहस्य बना है क्योंकि वैभव व सम्पदाओं का खजाना होने बाद भी इसे यूं ही छोड़ दिया गया। 'माचू पिच्चू" का प्राथमिक भवन इंतीहुआताना एवं तीन खिड़कियों वाला कक्ष प्रमुख है। 'इंतीहुआताना" को 'सूर्य मंदिर" भी कहा जाता है।
      करीब सवा तीन सौ वर्ग किलोमीटर दायरे में फैले इस हिस्टोरिकल सेंचुरी (ऐतिहासिक अभ्यारण) में बेशकीमती खजाना भी मिला था। विशेषज्ञों की मानें तो 'माचू पिच्चू" को हथियाने व लूटने के लिए शासकों के बीच चुनौतियां रहीं। इतिहासकारों की मानें तो इतिहासकार बिंघम शायद पहला बाहरी इंसान था जिसकी दृष्टि इसकी बेशकीमती विलक्षणता पर पड़ी।
    'माचू पिच्चू" में सर्वाधिक चर्चित स्थान 'इंका ट्रेल ट्रैक" भी है। यह ट्रैक 4215 मीटर की ऊंचाई तक ले जाता है। इस ट्रैक पर प्राचीनकाल इंका के तराशे पत्थर भी मिलते हैं। वर्ष में एक बार ट्रैक पर रेस भी होती है। यह रेस 26 मील के मैराथन की तरह होती है। इस रेस को जीतने का अब तक का सबसे कम समय 26 मिनट का रहा। इस ट्रैक का सबसे खूबसूरत नजारा सूर्य उद्गम होता है। 
       सूर्य का उद्गम पर्वत की चोटियों से होकर होता है। जिससे पर्वत के सौन्दर्य को चार चांद लग जाते हैं। राजसी शासन की अवधि में इस क्षेत्र में प्रवेश के नियम एवं व्यवस्थायें थीं। खास यह था कि किसी भी देश के अपने पारम्परिक परिधान में प्रवेश नहीं मिलता था। यूं कहा जाये कि 'माचू पिच्चूू" में प्रवेश के लिए सदियों पूर्व ड्रेस कोड लागू था तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

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