Thursday, 31 August 2017

अमेरिका का माउंट रुश्मोरे : विशिष्ट एवं शिल्प सौन्दर्य

      भले ही कलाकृतियां बहुत अधिक पुरानी-प्राचीन न हों लेकिन अपनी विशिष्टता से एक अलग पहचान बना ही लेती हैं। 

       जी हां, युनाईटेड स्टेट्स का 'माउंट रुश्मोरे" भले ही अत्यधिक प्राचीन न हो लेकिन दुनिया का एक आकर्षण है। हालात यह हैं कि देश-दुनिया की कलाकृतियों का उल्लेख हो आैर अमेरिका के 'माउंट रुश्मोरे" का उल्लेख न हो तो कहीं न कहीं कुछ अधूरा सा लगता है। माउंट रुश्मोरे कलाकृति अत्यधिक पुरानी तो नहीं लेकिन विशिष्टता पहचान बन गयी। 
       माउंट रुश्मोरे का निर्माण करीब डेढ दशक में पूर्ण हो सका। इसके निर्माण में सौ-पचास नहीं बल्कि चार सौ से अधिक कुशल कारीगरों ने इसे तराशा-सजाया-संवारा। माउंट रुश्मोरे का निर्माण 4 अक्टूबर 1927 में प्रारम्भ हुआ। इसके निर्माण में करीब डेढ दशक लगे। निर्माण के प्रथम चरण में डाइनामाइट से दर्जनों को चट्टानों का हटाया-तोड़ा या ध्वस्त किया गया। 
       इसमें अमेरिका चार पूर्व राष्ट्रपतियों की छवियों को रुपांकित किया गया या उकेरा गया। इनमें जार्ज वाशिंगटन, थॉमस जेफरसन, थियोडोर रुजवेल्ट एवं अब्रााहम लिंकन की छवियां हैं। इस विशाल कलाकृति में पूर्व राष्ट्रपतियों के भव्य-दिव्य चेहरे दिखते हैं। साउथ डकोटा में कीस्टोन के समीप स्थित 'माउंट रुश्मोरे" नेशनल मेमोरियल गुलजोन बोरग्लम द्वारा निर्मित स्मारक है। यह एक ग्रेनाइट मूूर्तिकला है। 
       इसे संयुक्त राज्य अमेरिका स्मारक भी कहा जाता है। स्मारक खास तौर से छवियों की उंचाई 18 मीटर से भी अधिक है। 'माउंट रुश्मोरे" मुख्यत: ग्रेनाइट चेहरों वाली एक अतिसुन्दर मूर्तिकला है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कीस्टोन ब्लैक हिल्स में रुपांकन किया गया। गुटजोन बोरग्लम व उनके पुत्र लिंकन बोर्लुम के संयुक्त प्रयासों का एक शानदार परिणाम है। 
      दक्षिण डकोटा के प्रसिद्ध इतिहासकार डोअनी रॉबिन्सन ने क्षेत्र को पर्यटन के तौर पर बढ़ावा देने के लिए ब्लैक हिल्स को अपने तौर-तरीके से रेखांकित किया। इसकी नक्काशी का श्रेय रॉबिन्सन को जाता है। रॉबिन्सन का मूर्तिकला में भी अच्छा दखल था। 
       ग्रेनाइट की खराब गुणवत्ता के बावजूद विशेषज्ञों ने विशेष बना दिया। 'माउंट रुश्मोरे" को महान राजनीतिक संरक्षक स्थल के तौर पर भी अभिलेखों में दर्ज किया गया है। अमेरिका के सीनेटर पीटर नोरैक के कार्यकाल में इस प्रसिद्ध एवं विशालकाय मूर्तिशिल्प का खाका खींचा गया। स्मारक का निर्माण सामान्यत: 1927 में प्रारम्भ हुआ। छवियों के चेहरों का निर्माण 1934 से 1939 के बीच पूरा हो सका।
     निर्माणकर्ता गुटजोन बोरग्लम की मौत मार्च 1941 में होने के बाद उनके पुत्र लिंकन बोर्लुम ने निर्माण कार्य पूर्ण कराया। अन्तोगत्वा, 'माउंट रुश्मोरे" संयुक्त राज्य अमेरिका का एक शानदार प्रतीक बन गया। विशेषज्ञों की मानें तो देश-दुनिया के दो लाख से अधिक पर्यटक प्रति वर्ष 'माउंट रुश्मोरे" के शिल्प सौन्दर्य देखने आते हैं।

                                        

Wednesday, 30 August 2017

रेसट्रैक प्लाया : प्राकृतिक सौन्दर्य पर बेहद खतरनाक

         सामान्यत: प्रकृति की गोद में सौन्दर्य का बोध होता है लेकिन दुनिया के असंख्य स्थल इस मिथक या भ्रम को तोड़ते दिखते हैं।

      जी हां, अमेरिका रेसट्रैक प्लाया दुनिया का सबसे खतरनाक स्थान माना जाता है। सामान्यत: इसे दुनिया में डेथ वैली के तौर पर पहचाना-जाना जाता है। दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शुमार होने वाले 'रेसट्रैक प्लाया" में कहीं कोई जन-जीवन नहीं है। 'रेसट्रैक प्लाया" तो छोडिए आसपास भी कहीं कोई जनजीवन नहीं दिखता। यहां कहीं कुछ यदि चलायमान है तो 'पत्थर" ।
     जी हां, सौन्दर्य बोध से परिपूरित 'रेसट्रैक प्लाया" में पत्थर स्वत: चलायमान होते हैं। रेसट्रैक प्लाया डेथ वैली में मौजूद पत्थर श्रंखलाओं को कभी एकल तो कभी समूह में चलते देखा व महसूस किया जा सकता है। यह दशा-दिशा अचरज-अजूबा या आश्चर्य से कम नहीं लेकिन यह हकीकत है। अमेरिका का रेसट्रैक प्लाया डेथ वैली देश-दुनिया में चर्चा एवं कौतुहल का विषय बना हुआ है।
      यह डेथ वैली अमेरिका का एक अतिविशालतम रेगिस्तान है। यह पूर्वी कैलिफोर्निया इलाके में आता है। यह मोजावे रेगिस्तान का हिस्सा है। उत्तरी अमेरिका के सबसे निचले शुष्क एवं गरम स्थानों में से एक है। समुद्र तल से करीब 282 फुट नीचे आंकलित यह इलाका अपनी विशिष्टताओं के कारण ख्याति रखता है। विशेषज्ञों की मानें तो डेथ वैली पश्चिमी गोलार्ध में सर्वाधिक तापमान का रिकार्ड रखता है।
      खास यह है कि पत्थर श्रंखला तापमान के दबाव एवं रसायनिक कारणों से स्वयं कम्पित एवं चलायमान होती है। कई बार यह पत्थर श्रंखला या एकल पत्थर हमलों की मुद्रा में आ जाते हैं। ऐसा तापमान के दबाव एवं रसायनिक कारणों से होता है। ऐसे में बचाव करना असंभव हो जाता है। लाजिमी है कि पत्थरों के हमलों से जान जोखिम में पड़ जाती है।
      कैलिफोर्निया एवं नेवादा की सीमा वाले इलाके में स्थित यह डेथ वैली अपने आगोश में प्रकृति का सौन्दर्य में समेटे है। इस डेथ वैली को अमेरिका में नेशनल पार्क का दर्जा भी हासिल है। पूर्व दिशा में अमार्गोसा रेंज है तो पश्चिम में पैनामिंट रेंज है। सिल्वानिया एवं आउल्सहेड की पर्वत श्रंखला भी उत्तर एवं दक्षिण सीमाओं पर है।
       करीब 7800 वर्ग किलोमीटर के दायरे वाले इस खतरनाक डेथ वैली को देश-दुनिया के बाशिंदे नजदीक से देखने की इच्छा रखते है लेकिन खतरों को भांप कर दूर ही रहना मुनासिब समझते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो डेथ वैली में पत्थरों की शक्ल में 'सॉल्ट पैन्स" फैले हुये हैं।
        डेथ वैली में यह 'सॉल्ट पैन्स" रसायनिक एवं प्राकृतिक देन है। भूवैज्ञानिकों की मानें तो यहां कभी झीलों का इलाका था लेकिन समुद्री झीलों का यह इलाका धीरे-धीरे सूखता गया। काफी लम्बे समय में यह रेगिस्तान में तब्दील हो गया।   

Tuesday, 29 August 2017

शिजुओ के गौतम बुद्ध : विश्व के विशालतम

         शिजुओ की पहाड़ी पर 'आश्चर्य" की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। 'आश्चर्यजनक किन्तु सत्य" जी हां, चाइना की शिजुओ की पहाड़ी अपनी खूबियों के लिए देश-दुनिया में विख्यात है। 

     इन खूबियों व आश्चर्यजनक कलाकृतियों में भगवान गौतम बुद्ध की विशाल प्रतिमा विद्यमान है। विशेषज्ञों की मानें तो 'लेशान के विशालकाय बुद्ध" दुनिया के विलक्षण बुद्ध हैं। चाइना के लेशान की पहाड़ियों में पत्थर पर उत्कीर्ण भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा करीब 71 मीटर अर्थात 233 फुट ऊंची है। इस विशालकाय प्रतिमा को आठवीं शताब्दी में तैयार किया गया था। प्रतिमा की बनावट ऐसी है, जैसे प्रतिमा तीन नदियों को निहार रही हो।
      इसका चेहरा माउंट एमेई की तरफ है। माउंट एमेई बौद्ध धर्मावावलम्बियों का अति पवित्र धार्मिक स्थल है। निर्माण के समय इस स्थान पर तेरह मंजिला लकड़ियों का एक ताकतवर स्ट्रक्चर बनाया गया था। यहां सोने का मढ़ाव भी है। युआन राजवंश के शासनकाल में मंगोल आक्रमणकारियों ने इसे नष्ट कर दिया था। 
     लेशान की यह विशाल प्रतिमा आसन में विद्यमान है। चेहरे पर सौम्यता तो शारीरिक बलिष्ठता परिलक्षित होती है। यह तीन नदियों के संगम स्थल पर विद्यमान है। यह तीन नदियां मिन नदी, क्वीनगई नदी व दादू नदी हैं। संगम का यह स्थान चाइना के लेशान शहर में है। यह सिचुआन प्रांत के पूर्व में है। देश दुनिया के प्राकृतिक सौन्दर्य वाले स्थानों में जाना जाता है।
      वर्ष 1996 के दिसम्बर में यूनेस्को ने भगवान गौतम बुद्ध के इस स्थान को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रतिमा का निर्माण 90 वर्ष से भी अधिक समय में पूर्ण हो सका। निर्माण में असंख्य कारीगरों ने सहयोग किया था। दुनिया की यह सबसे बड़ी बुद्ध प्रतिमा के तौर पर पहचान रखती है।
     खास यह है कि पत्थर पर खुदाई से संरचित इस प्रतिमा के साथ ही स्थल पर बौद्ध धर्म की कविता, गीत व कहानी भी चित्रित हैं। यह अति शांतिपूर्ण स्थल है। यह प्रतिमा 233 फुट ऊंची है तो ऊंगलियां लगभग 27 फुट की हैं। कंधों की चौड़ाई 24 मीटर अर्थात 79 फुट है। विशेषज्ञों की मानें तो इस धार्मिक एवं कलात्मक परियोजना की शुरुआत एक साधु हाई टॉग ने की थी।
        साधु ने भावनाओं के अनुरूप इस स्थल का चयन प्रतिमा के लिए किया तो पूरी शिद्दत से निर्माण भी पूर्ण हुआ। साधु ने परियोजना का कार्य प्रारम्भ कराया लेकिन पूूर्ण नहीं करा सका लेकिन बाद में साधु हाई टॉग के शिष्य श्रंखला ने इस परियोजना को पूर्ण आकार दिलाया था। इसमें 90 वर्ष का परिश्रम समाहित है। यह स्थापत्य कला का विश्व का अनुकरणीय उदाहरण है।
      इसमें वास्तुशास्त्र भी दृष्टिगत होता है तो वहीं कौशल्य भी वैशिष्टय स्थान रखता है। जलनिकासी के पर्याप्त प्रबंध दिखते हैं। दुनिया में इसकी खास ख्याति है। बुद्ध प्रतिमा के नवीकरण के लिए देश दुनिया ने व्यापक स्तर पर ध्यान दिया। चाइना सरकार ने लगभग 1963 में मरम्मत का कार्य प्रारम्भ किया था जिससे रखरखाव न होने के कारण क्षतिग्रस्त हुए हिस्से का सुधार किया जा सके। अब रखरखाव यूनेस्को के विशेषज्ञों की देखरेख में किया जाता है।  

Friday, 25 August 2017

स्नेक आइलैण्ड : सांपों की सल्तनत

         'सांपों की सल्तनत" जी हां, दुनिया में एक स्थान ऐसा भी है, जहां सांपों की सल्तनत अर्थात हुकूमत चलती है। आश्चर्य ही होता है कि कहीं पशु-पक्षियों-जीव-जन्तुओं की हुकूमत हो।

 यह कोई कपोल कल्पना या किवदंती नहीं बल्कि हकीकत है। ब्राजील दुनिया में अपनी खूबसूरती-सौन्दर्य के लिए जाना जाता है लेकिन ब्राजील की धरती पर जहरीलापन भी कम नहीं। ब्राजील का 'स्नेक आइलैण्ड" असंख्य सर्प प्रजातियों से अच्छादित है। धरती हो या पेड़-पौधे सभी स्थान पर सांप-सर्प मिल जायेंगे। दुनिया की शायद ही कोई सर्प प्रजाति हो जो यहां न मिले। सांप खतरनाक भी आैर खूंखार भी। खंखार ऐसे जिसे देख कर ही इंसान की मौत हो जाये। खतरनाक ऐसे जिसके दंश से पल-दो पल की ही जिन्दगी शेष रहे।
         विशेषज्ञों की मानें तो साओ पौलो से करीब 93 मिल दूर यह एक समुद्री टापू है। इसे ब्राजील सहित दुनिया में 'स्नेक आइलैण्ड" के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस 'स्नेक आइलैण्ड" में सर्प संख्या का घनतत्व अत्यधिक है। आैसत हर वर्ग मीटर में पांच से छह सर्प पाये जाते हैं। हालात यह हैं कि एक बेड के स्थान पर छह से आठ या दस सांप आसानी से पाये जाते हैं। 
     स्नेक आइलैण्ड के सर्प अत्यंत जहरीले अर्थात दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में गिने जाते हैं। सर्प दंश से कोई भी व्यक्ति बमुश्किल दस से पन्द्रह मिनट जिन्दा रह पाता है। विशेषज्ञों की मानें तो ब्रााजील में होने वाली मौतों के लिये सर्प दंश ही मुख्य कारक है। ब्रााजील में 90 प्रतिशत मौतें तो सर्प दंश से होती हैं। इस आइलैण्ड का क्षेत्रफल करीब साढ़े चार लाख वर्गमीटर है।
     सांपों की संख्या बीस लाख से अधिक आंकलित है। इनको गोल्डन पिटवाइपर सांप के तौर पर जाना जाता है। इस आइलैण्ड में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहां सांप न हो। कहीं जमीन पर सांप चलते दिखेंगे तो कहीं पेड़ पर लटके दिख जायेंगे तो कहीं चट्टान में छिपे होंगे। हालांकि ब्राजील प्रशासन की ओर इस विलक्षण टापू में आम व्यक्तियों का प्रवेश पूूर्णतय: वर्जित है। 
         ब्राजीलियन नेवी ने क्षेत्र को प्रतिबंधित कर रखा है लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई इस आइलैण्ड में नहीं जाता। सर्प विशेषज्ञ एवं शोधार्थी निरन्तर 'स्नेक आइलैण्ड" आते-जाते है तो कुछ प्रवास भी करते हैं। सामान्तय इस आइलैण्ड में किसी के जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। इस आइलैण्ड का नाम 'इलहा डी क्विमाडा ग्रांड" है लेकिन सामान्यत इसे 'स्नेक आइलैण्ड" के नाम से जाना जाता है।
    यह पूरा क्षेत्र बंजर, चारागाह व चट्टानों से आच्छादित है। इस आइलैण्ड में इल्हा दा वनस्पति प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। वनस्पतियों के साथ साथ पक्षियों की दर्जनों प्रजातियां कोलाहल करती रहती हैं। खास यह है कि पशु-पक्षियों व वनस्पतियों तथा सांपों की आबादी को एक दूसरे से कहीं कोई खतरा नहीं। यह वन क्षेत्र वर्षा क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है। स्नेक आइलैण्ड के चौतरफा समुद्री क्षेत्र होने के कारण शीतलता की अनुभूति होती है।

Thursday, 24 August 2017

आस्ट्रेलिया की मुर्रे नदी : विलक्षण खनिज सम्पदा

      आस्ट्रेलिया की 'मुर्रे नदी" दुनिया के अद्भूत खनिज भण्डारण के लिए ख्याति प्राप्त है। खनिज सम्पदा की बात हो या फिर जलजीवन को संरक्षित करने का विषय हो.... 'मुर्रे नदी" का कहीं कोई सानी नहीं। 

       लाल पत्थरों के शिलाखण्डों पर प्रवाहित यह नदी वैसे तो आस्ट्रेलिया की लाइफ लाइन मानी जाती है लेकिन वहीं दुनिया की शीर्ष एवं बड़ी नदियों में श्रंखलाबद्ध है। करीब 3750 किलोमीटर लम्बी 'मुर्रे नदी" को भी जलीय परिवर्तन के दंश झेलने पड़े। सागर में विलय होने से पहले आस्ट्रेलिया की इस विलक्षण नदी का जल कभी मीठा तो कभी साधारण हो जाता है।
          विशेषज्ञों की मानें तो पर्यावरणीय एवं आैषधीय पौधों का प्रभाव सीधे नदी के जल पर पड़ता है। पर्यावरणीय एवं आैषधीय पेड़-पौधों के घषर्ण से जल के स्वाद में परिवर्तन स्वाभाविक है। आस्ट्रेलिया के ऊंचे व शीर्ष पहाड़ों के बीच से गुजरने वाली 'मुर्रे नदी" विक्टोरिया, न्यू साउथ वेल्स, दक्षिण आस्ट्रेलिया के क्वींसलैण्ड आदि इलाकों को आच्छादित करती है। विशेषज्ञों की मानें तो मुर्रे नदी को आस्ट्रेलिया में स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य कटोरा के तौर पर माना जाता है। 
       कारण इस नदी में मछलियों की असंख्य एवं विलक्षण प्रजातियां उपलब्ध हैं। आस्ट्रेलिया के 58 प्रतिशत कृषि क्षेत्र की सिंचाई मुर्रे नदी व इसकी सहायक नदियों से होती है। दुनिया की प्रसिद्ध मछलियां इस विलक्षण नदी की रौनक एवं शोभा हैं। मछलियों की प्रजातियों में मर्रे कॉड, ट्राउंड कॉड, गोल्डन बसेरा, मैक्वेरी बसेरा, चांदी बसेरा, भूरी ट्राउट, मछली पूंछ कैटफिश, आस्ट्रेलिया गलाना, क्रेफिश, झींगा आदि हैं तो वहीं चूहों की विलक्षण प्रजातियां इस नदी में पायी जाती हैं। 
         चूहों की यह प्रजातियां जल अर्थात पानी में ही रहती हैं। नदी का जल सामान्य तो तलहटी लाल रंग की दिखती है। आस्ट्रेलिया में इसे देश की सांस्कृतिक नदी की तरह मान्यता है। कारण यह लाइफ लाइन के साथ साथ खनिज व जलजीवन का पर्याप्त रुाोत है।
       आस्ट्रेलिया में इसे मुर्रे डार्लिंग के नाम से जाना-पहचाना जाता है। नदी को भी संक्रमण के झटके लगे लेकिन 90 प्रतिशत निदान हो गया। इसे आस्ट्रेलिया में एक प्राकृतिक चमत्कार के तौर पर देखा जाता है। खास यह है कि नदी का एक किनारा अधिसंख्य इलाकों में लाल पत्थर श्रंखला से लबरेज दिखता है तो दूसरा किनारा पर्यावरण से भरपूर दिखता है।
     नदी के किनारों में प्राचीन जीवाश्म चूना पत्थरों का अपार भण्डारण है। आस्ट्रेलिया में इस खनिज सम्पदा का कहीं कोई अंत नहीं। यूं कहा जाये कि मुर्रे नदी आस्ट्रेलिया का सौन्दर्य है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।   
                 
         

Wednesday, 23 August 2017

वाटर स्पाउट्स : विलक्षणता का एक आयाम

        जल केवल जीवन ही आनन्द का परिचायक भी है। साफ सुथरा पानी पियेंगे तो प्यास बुझेगी। शारीरिक आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति होगी लेकिन पानी की अठखेलियां तन-मन-मस्तिष्क प्रफुल्लित-पुलकित अवश्य होगा।

मशीनी रैन डांस-मशीनी वाटर डांस तो मेगाटाउन्स में देखने को मिल जायेंगे लेकिन नेचुरल वाटर डांस देखने के लिए नेचर की गोद में ही जाना होगा। 'वाटर स्पाउट्स" से ख्याति जल नृत्य अर्थात वाटर डांस नीदरलैण्ड, आस्ट्रेलिया व कतर आदि में देखे जा सकते हैं लेकिन फ्लोरिडा का वाटर स्पाउट्स विलक्षण है। सामान्यत: धूूली बवंडर भयभीत करने वाले अथवा डरावने होते हैं लेकिन फ्लोरिडा के जल बवंडर रोमांचित करने वाले होते हैं।
       इसे जल स्तम्भ, जलव्रज, जलवज्र, बवंडर या चक्रवात कुछ भी कह सकते हैं। यह जल से बने स्तम्भ के आकार के दिखते हैं। मुख्यत: इस तरह के जलस्तम्भ यूरोप एवं अंटार्कटिका में बनते-बिगड़ते दिखते हैं। दुनिया के अन्य देशों व अन्य स्थानों पर भी दिखते हैं किन्तु अत्यंत मुश्किल से। फ्लोरिडा में 'वाटर स्पाउट्स" समुद्री इलाके में आम हैं।
      'वाटर स्पाउट्स" किसी भी क्षण में मनमोह लेते हैं। कहीं यह तीन चरणों में होता है तो कहीं पांच चरणों में दिखता है। 'वाटर स्पाउट्स" एक गोला अंधकार से युक्त होता है तो दूसरा गोला घूमता सा प्रतीत होता है। एक अन्य में यह अंगूठी की भांति दिखता है। एक अन्य में यह एक जल स्तम्भ के शक्ल में दिखता है। अन्तत: कुछ पलों में यह सब विलुप्त हो जाता है।
      'वाटर स्पाउट्स" करीब दो किलोमीटर के दायरे में दिखते हैं। हालांकि यह दायरा कम या अधिक भी हो सकता है। जलवायु परिवर्तन या अनुकूल वातावरण का प्रभाव भी 'वाटर स्पाउट्स" पर पड़ता है। खास बात यह है कि 'वाटर स्पाउट्स" में बवंडर जैसे गुण नहीं होते। यह सूखे मौसम में भी बनते हैं।
         हालांकि इनका जीवन चक्र अत्यधिक लघु अर्थात बीस मिनट के आसपास ही होता है। यह एक प्रकार से बादलों के आवेग-आवेश से बनते हैं। बादलों का आवेग नीचे आने लगता है तो जल अर्थात पानी की क्रिया अथवा क्रीड़ा दिखने लगती है। मुख्यत: यह जल वाले क्षेत्रों में ही बनते बिगड़ते हैं। कारण जल को आसानी से घूमने का मौका मिल जाता है। फ्लोरिडा के जलवायु में 'वाटर स्पाउट्स" निरन्तर दिखते हैं।  

Tuesday, 22 August 2017

इग्वाजू नदी : पौने तीन सौ झरनों की श्रंखला

       'सौन्दर्य का खजाना" निश्चय ही मन-मस्तिष्क को तारो-ताजा एवं प्रफुल्लित कर देता है। देश-दुनिया में प्राकृतिक खजाना की कहीं कोई कमी नहीं। 


       देश-दुनिया के लिए यह जहां एक ओर राजस्व का बड़ा माध्यम है तो वहीं दूसरी ओर पर्यटकों के विशेष आकर्षण के केन्द्र भी हैं। इनमें अद्भूत एवं विलक्षणता से परिपूरित दृश्य मन को लुभाते हैं। अर्जेंटीना एवं ब्राजील सीमा की 'नदी इग्वाजू" अपने प्राकृतिक सौन्दर्य से देश-दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनी है। देश-दुनिया के लाखों पर्यटक इस नदी की विलक्षणता की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखते हैं। 
      दुनिया के सात प्राकृतिक चमत्कारों में 'इग्वाजू नदी" भी शामिल है। नदी के झरनों को देख कर कौतुहल होता है कि आखिर यह भी है ?। नदी क्षेत्र में एक स्वप्न सा लगता है क्योंकि एक साथ एक स्थान पर पौने तीन सौ झरनों को गिरते देखना किसी स्वप्न से कम नहीं लगता। झरनों का यह समूूह करीब तीन किलोमीटर के दायरे में फैला है।
    एक साथ झरनों के समूह-श्रंखला को देखना किसी रोमांच से कम नहीं होता। वर्ष 1986 में झरनों की इस श्रंखला को यूनेस्को ने वल्र्ड हेरिटेज क्षेत्र घोषित किया है। झरनों के इस क्षेत्र को मिसिओनेस के नाम से जाना जाता है। अर्जेंटीना को दुनिया में सर्वाधिक प्राकृतिक सौन्दर्य वाला देश माना जाता है। इन प्राकृतिक सौन्दर्य में झरनों की यह श्रंखला भी है। 
    इग्वाजू नदी का यह झरना श्रंखला विश्व में प्रसिद्ध है। अर्जेंटीना ने इस क्षेत्र को राष्टीय उद्यान क्षेत्र घोषित किया है। अर्जेंटीना का सौन्दर्य से परिपूरित यह क्षेत्र करीब बीस किलोमीटर के दायरे में है जबकि झरना श्रंखला करीब तीन किलोमीटर दायरे में है। इग्वाजू नदी करीब 1200 किलोमीटर की यात्रा तय करती है। इसका उद्भव ब्राजील से है तो अर्जेंटीना में इसकी खूबसूरती दिखती है। 
    नदी की इस यात्रा में पठार श्रंखला की समृद्धता दिखती है। बलुआ पत्थर श्रंखला की इस क्षेत्र में बहुलता है। झरना एवं नदी क्षेत्र में परतों एवं दरारों की श्रंखला दिखती है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भूत दृश्य होता है। भौगोलिक दशा ऐसी है कि झरना एवं नदी के जल प्रवाह से भीषण एवं भयंकर गर्जना सुनाई देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कोई राक्षस गर्जना कर रहा हो।
      किवदंती है कि इस नदी में बोई नाम का सांप रहता है। यह सांप नित्य वर्ष आदिवासी समुदाय से एक आैरत की बलि लेता था। जिससे एक भय भी था। एक बार एक बहादुर महिला गुआरानी अबोरीगिन ने इस मिथक को तोड़ दिया। गुआरानी ने नदी से संघर्ष कर खुद को बचा लिया। वस्तुत: जल प्रवाह में महिला का बलिदान हो जाता था। 
     सौन्दर्य बोध को रेखांकित करने वाला झरना श्रंखला चांद की खूूबसूरती का अवलोकन कराता है। झरना श्रंखला के बीच चांद ऐसे दिखता है, जैसे चांद झरनों के साथ चल रहा है। झरना श्रंखला को देखने के लिए नदी के उपर एक शानदार पुल भी बना है। जिससे पर्यटक-दर्शक झरनों को आैर अधिक निकट जाकर सौन्दर्य का आनन्द ले सकते है। पर्यटन की दृष्टि आवागमन के संसाधन विकसित किये गये हैं।

                         

टियाटिहुआकन : पिरामिड श्रंखला का शहर     'रहस्य एवं रोमांच" की देश-दुनिया में कहीं कोई कमी नहीं। 'रहस्य" की अनसुलझी गु...